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इस मरु भूमि में आकरके तुमने श्रृंगार सजाया है इस मरु भूमि में आकरके तुमने श्रृंगार सजाया है नैनों की इन लताओं में अस्को का दरिया समाया है कुछ… Read More
ये जिंदगी क्यों इतनी नीरस हो गयी ये जिंदगी क्यों इतनी नीरस हो गयी यहाँ तो मेरे पास सब कुछ है सिर्फ तुम्हारे सिवा फिर भी मन में आज ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है क्या ये प्रेम … Read More
बस तू मेरी माँ मुझे प्यार करे मै फूल हु तेरी बगिया का मै निश्छल हु मै निर्मल हु फिर भी न जाने दुनिया को है प्यार नही मुझसे तेरा आँचल मुझको मिल जाये तेरी गोद में मुझको … Read More
तब कोई क्या कृष्णा की तरह इनकी लाज बचाएगा राजनीति का शब्द अब अपसब्द जैसे बन गया नैतिकता का जैसे अब पतन इनमे हो गया मानसिकता का स्तर इस क़द्र गिर जायेगा इनमे इनके लिए अब खुदा भी मुसाफिर हो गया … Read More
मुझे दर दर मरने छोड़ दिया क्यों हमारे सपने को चकनाचूर किया हमने भी कुछ सोचा था पाने लिए लेकिन उसने हमारी अस्मिता को झकझौर दिया चंद लम्हों के सुकून की खातिर हमारे सपनो को तोड़ द… Read More
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