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Thursday, 4 September 2014
Wednesday, 3 September 2014
Tuesday, 26 August 2014
मेरा मुझमे क्या है ये रोज सवाल करता हूँ
मेरा मुझमे क्या है ये रोज सवाल करता हु
अपनी ही बातो में उलझ कर मै रोज बवाल करता हु
खोया खोया गुमसूम सा
अनजाने लम्हों का हिसाब रखता हु
मेरा मुझमे क्या है ये रोज सवाल करता हु
तू थी तुझसे लड़ता था
कभी रूठता था कभी मनाता था
तुम मुझको सताती थी
मै तुमको चिढाता था
अब बस तुम नही हो
लेकिन संग तेरी यादे है
तेरी यादो के संग
तन्हा रातो से बात करता हूँ
मेरा मुझमे क्या है ये रोज सवाल करता हूँ
अपनी ही बातो में उलझ कर मै रोज बवाल करता हु
खोया खोया गुमसूम सा
अनजाने लम्हों का हिसाब रखता हु
मेरा मुझमे क्या है ये रोज सवाल करता हु
तू थी तुझसे लड़ता था
कभी रूठता था कभी मनाता था
तुम मुझको सताती थी
मै तुमको चिढाता था
अब बस तुम नही हो
लेकिन संग तेरी यादे है
तेरी यादो के संग
तन्हा रातो से बात करता हूँ
मेरा मुझमे क्या है ये रोज सवाल करता हूँ
Sunday, 24 August 2014
टाइटैनिक के दो दृश्य
चारो तरफ भीड़ ही भीड़ थी
हर दिशा में शोर था
किसी को किसी की आवाज सुने नही दे रही थी
हर कोई अपने सपनो के साथ एक नयी उड़ान भरने को तैयार था
सो मै भी बिना पंख के उड़ने की कोशिश कर रहा था
एक नए सफ़र के साथ एक नयी मंजिल की तलाश में
हम चलते चले जा रहे थे
वो समंदर की लहरे भी कितनी सुहावनी लग रही थी
सब अपने अपने में व्यस्त थे
कही गाना बजाना हो रहा था
तो कही कोई नाच झूम रहा था
हर दिशा में शोर था
किसी को किसी की आवाज सुने नही दे रही थी
हर कोई अपने सपनो के साथ एक नयी उड़ान भरने को तैयार था
सो मै भी बिना पंख के उड़ने की कोशिश कर रहा था
एक नए सफ़र के साथ एक नयी मंजिल की तलाश में
हम चलते चले जा रहे थे
वो समंदर की लहरे भी कितनी सुहावनी लग रही थी
सब अपने अपने में व्यस्त थे
कही गाना बजाना हो रहा था
तो कही कोई नाच झूम रहा था
Sunday, 20 July 2014
Friday, 18 July 2014
हम सुधरेंगे तभी जग सुधरेगा
मैं यहाँ बहरीन में जॉब करता हु ये एक मुस्लिम बाहुल्य देश है यह पर कानून इतना अच्छा है की रात को १२ बजे भी कोई लड़की जा रही है तो किसी की हिम्मत उसपर कमेंट करने की नही पड़ती है रपे तो बहुत दूर की कौड़ी है कोई लड़की स्वतंत्र रूप से कही भी घूम सकती है कही भी आ सकती है कही भी जा सकती है बिना किसी डर के बच्चे अकेले खेलते है उनके माँ बाप को कोई चिंता नही है की कोई किडनैप कर लेगा कोई उन्हें उठा ले जायेगा या कोई उनके साथ जोर जबरदस्ती करेगा नाही यह चोरी है न लूटमारी है न यही गलियो में कोई महिला की चैन लुटती है यहाँ एक पल के लिए लाइट नहीं जाती यह के नागरिको के लिए मुफ्त शिक्षा मुफ्त आवास रोजगार की गारंटी है
नहीं कही आपको तू तू मै मै दिखेगी हर जगह शांति है
और मजे की बात ये है यह की जनसँख्या लगभग १२ लाख है जिसमे से लगभग 6.5 लाख भारतीय है ये भी यह रहकर हर नियम का पालन करते है लेकिन वही अपने देश पहुंच कर ये भी वैसी मानसिकता के हो जाते है हमारे देश में इसीलिए कोई कानून का पालन नही होता क्योकि नियम बहुत है लेकिन वो लागू नही है कुछ लागू है तो वो नेताओ की गलियो में गुजरते ही लुप्त हो जाते है कुछ हमारी मानसिकता भी ऐसी बन गयी है की कुछ भी क्राइम करलो पैसे देके छूट ही जायेंगे नही तो ये नेता किस दिन काम आएंगे एकदम तुच्छ और घृणित मानसिकता से ग्रस्त हो गए है हम
जब तक हम नही सुधरते और इन नेताओ को नही सुधरते तब तक मेरे भाई इस देश में हर तरफ ऐसे ही कोहराम मचा रहेगा माताये बहाने लुटती रहेंगी बच्चो का अपहरण होता रहेगा गरीबो का खून ये मुठी भर नेता चूसते रहेंगे
हम बदलेंगे तभी जग बदलेगा
हम सुधरेंगे तभी जग सुधरेगा
नहीं कही आपको तू तू मै मै दिखेगी हर जगह शांति है
और मजे की बात ये है यह की जनसँख्या लगभग १२ लाख है जिसमे से लगभग 6.5 लाख भारतीय है ये भी यह रहकर हर नियम का पालन करते है लेकिन वही अपने देश पहुंच कर ये भी वैसी मानसिकता के हो जाते है हमारे देश में इसीलिए कोई कानून का पालन नही होता क्योकि नियम बहुत है लेकिन वो लागू नही है कुछ लागू है तो वो नेताओ की गलियो में गुजरते ही लुप्त हो जाते है कुछ हमारी मानसिकता भी ऐसी बन गयी है की कुछ भी क्राइम करलो पैसे देके छूट ही जायेंगे नही तो ये नेता किस दिन काम आएंगे एकदम तुच्छ और घृणित मानसिकता से ग्रस्त हो गए है हम
जब तक हम नही सुधरते और इन नेताओ को नही सुधरते तब तक मेरे भाई इस देश में हर तरफ ऐसे ही कोहराम मचा रहेगा माताये बहाने लुटती रहेंगी बच्चो का अपहरण होता रहेगा गरीबो का खून ये मुठी भर नेता चूसते रहेंगे
हम बदलेंगे तभी जग बदलेगा
हम सुधरेंगे तभी जग सुधरेगा
Wednesday, 16 July 2014
नैतकिता है क्या ये क्या जाने शब्दों के बाण चलाते है
नैतकिता है क्या ये क्या जाने
शब्दों के बाण चलाते है
हम खुले अस्मा में सोते है
ये महलो वाले क्या जाने
ये हँसे खबर बन जाती है
ये चले खबर बन जाती है
यहाँ जाने कितनी कब्र बनी
पर किसी को सुध नही आती है
हम जिए मरे परवाह नही
अपना कोई खैरख्वाह नही
हम भूखे दिन दिन सोये
जिनके पेट भरे वो क्या जाने
है दर्द गरीबी का हमे मिला
ठंडी में मई हर रात जगा
वी ठिठुरन ठण्ड की ऐसी थी
जैसे भगवान का श्राप लगा
जिनके तन पर मखमली वस्त्र
वो इस सिहरन को क्या जाने
वो इस सिहरन को क्या जाने
शब्दों के बाण चलाते है
हम खुले अस्मा में सोते है
ये महलो वाले क्या जाने
ये हँसे खबर बन जाती है
ये चले खबर बन जाती है
यहाँ जाने कितनी कब्र बनी
पर किसी को सुध नही आती है
हम जिए मरे परवाह नही
अपना कोई खैरख्वाह नही
हम भूखे दिन दिन सोये
जिनके पेट भरे वो क्या जाने
है दर्द गरीबी का हमे मिला
ठंडी में मई हर रात जगा
वी ठिठुरन ठण्ड की ऐसी थी
जैसे भगवान का श्राप लगा
जिनके तन पर मखमली वस्त्र
वो इस सिहरन को क्या जाने
वो इस सिहरन को क्या जाने
Saturday, 12 July 2014
ये क्या हुआ इन सफेदपोशो को
ये क्या हुआ इन सफेदपोशो को
क्यों हमारी डूबी लुटिया डुबोना चाहते है
हम तो उठ नही सकते है ये मालूम है हमे
फिर ये क्यों हद से ज्यादा अपने को गिराना चाहते है
वादो को करना और तोडना तो इनकी फितरत है
हमे दर्द बहुत मिला है जमाने से
फिर ये क्यों तड़पाना चाहते है हमे
क्यों हमारी डूबी लुटिया डुबोना चाहते है
हम तो उठ नही सकते है ये मालूम है हमे
फिर ये क्यों हद से ज्यादा अपने को गिराना चाहते है
वादो को करना और तोडना तो इनकी फितरत है
हमे दर्द बहुत मिला है जमाने से
फिर ये क्यों तड़पाना चाहते है हमे
Friday, 11 July 2014
प्यार और आकर्षण में बहुत अंतर होता है न जाने आज की पीढ़ी इसको पहचान ने में क्यों भूल करती है प्रेम सागर की तरह विशाल है
प्यार और आकर्षण में बहुत अंतर होता है न जाने आज की पीढ़ी इसको पहचान ने में क्यों भूल करती है
प्रेम सागर की तरह विशाल है
तो आकर्षण बहुत ही सूक्ष्म है
प्रेम में दया है करुणा है
तो आकर्षण में वासना है
प्रेम पापहीन है
आकर्षण पाप में लीन है
प्रेम हमे जीना सिखाता है
तो आकर्षण गहरे खड्डे में गिराता है
फिर हम क्यों नही पहचान पते है
प्रेम सागर की तरह विशाल है
तो आकर्षण बहुत ही सूक्ष्म है
प्रेम में दया है करुणा है
तो आकर्षण में वासना है
प्रेम पापहीन है
आकर्षण पाप में लीन है
प्रेम हमे जीना सिखाता है
तो आकर्षण गहरे खड्डे में गिराता है
फिर हम क्यों नही पहचान पते है
दोनों में जमीन आस्मां का अंतर है
There is a difference between love and attraction, why not let him forget that today's generation
There is a difference between love and attraction, why not let him forget that today's generation
Love is as vast as the ocean
It is very subtle attraction
Love is compassion, in kindness
If there is a desire to charm
Love is Paphin
Attraction is absorbed in sin
Love teaches us to live
Drops into a ditch so deep attraction
Why do we not recognize the address
The difference in both ground Asman
Love is as vast as the ocean
It is very subtle attraction
Love is compassion, in kindness
If there is a desire to charm
Love is Paphin
Attraction is absorbed in sin
Love teaches us to live
Drops into a ditch so deep attraction
Why do we not recognize the address
The difference in both ground Asman
Friday, 4 July 2014
मनुष्यता पर प्रहार
आजकल हम क्यों मनुष्यता पर प्रहार करने से नही चूकते है क्यों कभी कभी हम मासूमियत का भी गाला घोटने से हिचकिचाते नही है आजकल की दिनचर्या अपनी संस्कृति से खिलवाड़ ये क्या है क्यों हम इतने क्रुद्ध और निर्मम होते जा रहे है क्या दया भाव का लोप होता जा रहा है ऐसा क्यों सायद हम अत्यधिक स्वार्थी हो गए है और इतना की सिर्फ मै ही मैं दिखाई देता है और कछ दीखता ही नही हमारे आँखों के सामने उजाला होते हुए भी हम अन्धकार में ही जीना चाहते है या आदी हो गए है ऐसी दिनचर्या के लिए क्यों हम बदल नही सकते है क्या ये इतना कठिन कार्य है हमे बदलना होगा
सायद बदलाव ही उपाय है लेकिन ऐसा नही जैसा आजकल है
सायद बदलाव ही उपाय है लेकिन ऐसा नही जैसा आजकल है
बदलाव सार्थक होना चाहिए
So why do we have so much crime
Never in thanking the same
How were we going to ask them questions
We never used to talk to the moon in lonely nights
Just what we think we were right then or now
Then there was nothing to me except the heart
Today, everything else is just heart
Then we'd find a few money from happiness
happiness earn millions thirsting for now is too small
Relationships were then used as the friend of man
Now just means that the partner
The only time when there was no work for yourself
There is time for work and loved ones today
Never mind gets sad sometimes sobbing sobbing cries of
Nobody is listening to my voice today to the
If the above prey
If we can not tolerate such atrocities you
So why do we have so much crime
So why do we have so much crime
How were we going to ask them questions
We never used to talk to the moon in lonely nights
Just what we think we were right then or now
Then there was nothing to me except the heart
Today, everything else is just heart
Then we'd find a few money from happiness
happiness earn millions thirsting for now is too small
Relationships were then used as the friend of man
Now just means that the partner
The only time when there was no work for yourself
There is time for work and loved ones today
Never mind gets sad sometimes sobbing sobbing cries of
Nobody is listening to my voice today to the
If the above prey
If we can not tolerate such atrocities you
So why do we have so much crime
So why do we have so much crime
Thursday, 3 July 2014
when we saw him in the mirror Why then slew a million times
when we saw him in the mirror
Why then slew a million times, we
If you see of yourself in the mirror everyday we
But we were not too faint
That is the question we are asking ourselves
He Nur heaven or no Khksha
The prayer of the heart every moment that beauty
We think the same is staring in the mirror
We would love to get myself one day
But challenged every moment by yourself
Why is this so in love
Why then slew a million times, we
If you see of yourself in the mirror everyday we
But we were not too faint
That is the question we are asking ourselves
He Nur heaven or no Khksha
The prayer of the heart every moment that beauty
We think the same is staring in the mirror
We would love to get myself one day
But challenged every moment by yourself
Why is this so in love
acid attack in our hearts
The acid throwing incidents is growing in our country these days Bdin our mindset rolled reflecting how our mindset can not leave everything in the hands of the government. We also have some responsibility towards our society and our own country prati hum kab tak apni jimmedari se muh...
Friday, 27 June 2014
SAVE ENERGY RESOURCES
छिति जल पावक गगन समीरा , पंच रचित अति अधम सरीरा'
इन्ही पंचतत्वो से मिलकर हमारे शरीर का निर्माण हुआ है ..
जिससे हमारे शरीर का निर्माण हुआ उसी को हम नष्ट कर रहे है
और हम भी अपने अंत की ओर जा रहे है क्यों हम लोग सब कुछ जानते हुए भी अपनी प्राक्रतिक संपदा को नष्ट कर रहे है ,
इन्ही पंचतत्वो से मिलकर हमारे शरीर का निर्माण हुआ है ..
जिससे हमारे शरीर का निर्माण हुआ उसी को हम नष्ट कर रहे है
और हम भी अपने अंत की ओर जा रहे है क्यों हम लोग सब कुछ जानते हुए भी अपनी प्राक्रतिक संपदा को नष्ट कर रहे है ,




